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मंगलवार, अगस्त 31, 2010

राजनीती मैं जातिवाद

आज कल बिहार मैं चुनावी सरगर्मिया हैं . जिसके कारण नेता सब परेशां हैं. और न जाने क्या क्या बोल रहे है. क्या आज कल राजनेता सिर्फ जात की राजनीती करते हैं. अपना  सिर्फ सत्ता सुख पाना चाहते हैं. चाहे रास्ते कोई भी हो सत्ता आनी चाहिए. कोई कह रहा है की मुस्लिम CM  हो तो कोई कहता हैं की स्वर्ण CM बनने की नहीं सोच सकता है.क्या आज राजनीती सिर्फ सत्ता के लिए होती है. जातीय उन्माद फेला कर क्या सत्ता चाहिए?. हम इन्हें किय्नो  वोट दे की ये जितने से पहले इस तरह बोल रहे है क्या भरोसा की ये जितने के बाद इस तरह की कोई एसी  काम करे जिस से देश को सर्मिन्दा होना परे. आखिर क्या जरुरत हैं इस तरह की बयानबाज़ी की. अब  जनता पहले की तरह मुर्ख नहीं हैं. वो समझदार हो गयी है. लेकिन हमारे राजनेता को इस तरह के बयानबाज़ी से बाज़ आनी चाहिए. ऐसे लोगो को जनता मज़ा चखाएगी. हमरा देश सभी को ये अद्धिकार देती हैं की वो कोई भी पद पा सकता है . इसके लिए किसी खास जाती  या धर्म की होने की जरुरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट को इस तरह के बयानबाज़ी पर संज्ञान लेना चाहिए. इन पर करवाई होनी चाहिए. ताकि ये सब बंद हो.

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