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रविवार, अगस्त 29, 2010

नक्सली हमरे अपने नहीं हो सकते

आज कल देखने मैं ये आ रहा हैं की जो नक्सली अपने आपको गरीब जनता के हिमायेती कहते थे. इधर कुछ  दिनों से  इन्होने उसी आम जनता को पेरशान किया  हैं. ज्ञानेश्वरी हादसा और CRPF को  मारा  हैं.  जो किसी भी सूरत मैं सही नहीं. हम मानते हैं की उनकी कुछ मज़बूरी रही होगी तो इसका मतलब ये ही हैं की हम बन्दुक उठा  ले  जीस  वयस्था से परेशानी हैं उसके बारे मैं सरकार से बात करे.  नहीं तो इनको इन्ही के भाषा मैं जवाब देना चाहिए. ये हमारे अपने नहीं हो सकते जिस तरह इन्हों ने आम आदमी को परेशां कर रखा  हैं. आम आदमीं ने  इनका क्या बिगारा हैं. इन्हें तो सिर्फ सेना ही जवाब दे सकती हैं मगर हमारे माननीय नेतागन  को राजनीती करनी हैं तो प्रॉब्लम को जिन्दा रखना हैं. आज इन नेताओं के अपने खोए रहेते तो इन्हें मालूम चलता की किशी अपने को खोने क्या गम होता हैं . इसलिए नक्सलियों  को अपनी  बात रखनी  चाहिए नहीं तो सरकार इनेह सबक सिखए. और हर चीज़ मैं राजनेति नहीं करनी चाहिए.

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