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मंगलवार, अगस्त 24, 2010

Rajneeti Aur Paisa

आजकल जिस तरह कहा जा रहा है की राजनीती मैं युवा आये क्या यह संभव है कियोंकी जिस तरह से राजनीती मैं पैसों का खेल हो रहा है उसतरह हम एक साफ सूत्री राजनीती की कल्पना नहीं कर सकते हैं. पैसा ही आज राजनीती का खेल खेलती  हैं. आज की  राजनीती भ्रष्ट हो गयी हैं. और हम चाहते हैं की भ्रष्ठाचार मुक्त समाज हो. और कल्पना कर रहे हैं  ये तो बेमानी हैं साब. आज कोई किशी खास जमात को खुश करने मैं लगा है तो किशी और को. ये कब तक चलेगा साब. ये बंद होना  चाहिए. क्या आज से पहले स्व० इंदिरा गाँधी अगर अपनी सत्ता की चिंता करती तो क्या आज पंजाब खुशहाल होता. आज के राजनेता सिर्फ और सिर्फ सत्ता पाना चाहते हैं. हमारे बिहार के एक नेता हैं जो लगातार ८ साल मंत्री बने रहें काम भी किया मगेर जब वो सत्ता मैं नहीं हैं तो अनाप सनाप मांगे करते रहतें हैं. कल तक कह रहे थे की किशी खास समुदाय के व्यक्ति को CM  होना चाहिए मगेर आज सूरत क्या हैं ये सब जानते हैं. मगेर क्या ये सिर्फ सत्ता पाने का फंडा है. सत्ता मैं नहीं रहने पर इसतरह की बात करेंगे की जैशे लगेगा की इस नेता तो गंगा नहाया है (गंगा नहाना मतलब सत्यवादी). मगर सुरत ढ़ाक के तीन पात. बिहार मैं चुनाव हैं तो आप देखेंगे की तरह तरह की बातें सुनने को मिलेगी. हमारे यहाँ कहेंगी आपको हम तन्खाया देंगे तो आप की जात को नौकरी देंगे मगेर ये कोई नहीं कहेगा की हम गरीबों को मदद करेंगे किओयोंकी वो जानते हैंकी बिहार मैं वोट जात के आधार पर परतें हैं. आज की बात हैं आब लोग जान चुके हैं की विकाश क्या चीज हैं. आज मे २५ साल का युवा हूँ मैं ने आज तक जिश रोड को बचपन से देख रहा था. वो जर्जर हालात मैं था. पर आज सूरत बदली हैं. मुद्दा ये नहीं हैं की किश ने मदद की मुद्दा हैं की विकाश हो और विकाश से मातब नेता या किशी धर्म का नहीं बिहार का होना चाहिए. इस मैं युवा आये मगेर उनके पास पैसे का अभाव हैं. तो जिस तरह से पैसा लायेंगे क्या आप को लगता हैं की वो भ्रस्ताचार से मुक्त हो पाएंगे.  

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