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मंगलवार, अगस्त 31, 2010

राजनीती मैं जातिवाद

आज कल बिहार मैं चुनावी सरगर्मिया हैं . जिसके कारण नेता सब परेशां हैं. और न जाने क्या क्या बोल रहे है. क्या आज कल राजनेता सिर्फ जात की राजनीती करते हैं. अपना  सिर्फ सत्ता सुख पाना चाहते हैं. चाहे रास्ते कोई भी हो सत्ता आनी चाहिए. कोई कह रहा है की मुस्लिम CM  हो तो कोई कहता हैं की स्वर्ण CM बनने की नहीं सोच सकता है.क्या आज राजनीती सिर्फ सत्ता के लिए होती है. जातीय उन्माद फेला कर क्या सत्ता चाहिए?. हम इन्हें किय्नो  वोट दे की ये जितने से पहले इस तरह बोल रहे है क्या भरोसा की ये जितने के बाद इस तरह की कोई एसी  काम करे जिस से देश को सर्मिन्दा होना परे. आखिर क्या जरुरत हैं इस तरह की बयानबाज़ी की. अब  जनता पहले की तरह मुर्ख नहीं हैं. वो समझदार हो गयी है. लेकिन हमारे राजनेता को इस तरह के बयानबाज़ी से बाज़ आनी चाहिए. ऐसे लोगो को जनता मज़ा चखाएगी. हमरा देश सभी को ये अद्धिकार देती हैं की वो कोई भी पद पा सकता है . इसके लिए किसी खास जाती  या धर्म की होने की जरुरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट को इस तरह के बयानबाज़ी पर संज्ञान लेना चाहिए. इन पर करवाई होनी चाहिए. ताकि ये सब बंद हो.

रविवार, अगस्त 29, 2010

नक्सली हमरे अपने नहीं हो सकते

आज कल देखने मैं ये आ रहा हैं की जो नक्सली अपने आपको गरीब जनता के हिमायेती कहते थे. इधर कुछ  दिनों से  इन्होने उसी आम जनता को पेरशान किया  हैं. ज्ञानेश्वरी हादसा और CRPF को  मारा  हैं.  जो किसी भी सूरत मैं सही नहीं. हम मानते हैं की उनकी कुछ मज़बूरी रही होगी तो इसका मतलब ये ही हैं की हम बन्दुक उठा  ले  जीस  वयस्था से परेशानी हैं उसके बारे मैं सरकार से बात करे.  नहीं तो इनको इन्ही के भाषा मैं जवाब देना चाहिए. ये हमारे अपने नहीं हो सकते जिस तरह इन्हों ने आम आदमी को परेशां कर रखा  हैं. आम आदमीं ने  इनका क्या बिगारा हैं. इन्हें तो सिर्फ सेना ही जवाब दे सकती हैं मगर हमारे माननीय नेतागन  को राजनीती करनी हैं तो प्रॉब्लम को जिन्दा रखना हैं. आज इन नेताओं के अपने खोए रहेते तो इन्हें मालूम चलता की किशी अपने को खोने क्या गम होता हैं . इसलिए नक्सलियों  को अपनी  बात रखनी  चाहिए नहीं तो सरकार इनेह सबक सिखए. और हर चीज़ मैं राजनेति नहीं करनी चाहिए.

गुरुवार, अगस्त 26, 2010

मदर टेरेशा एक युग

मदर टेरेशा आज हमारे बीच नहीं है मगर वो एक ऐशी पवित्र आत्मा है जो किसी न किसी रूप मैं हमारे आस पास होने का एहसाश कराती हैं. आज हमरे विश्व को ऐशीही पवित्र आत्मा की जरुरत हैं. आज हम जिस दुनिया मैं हैं. उस दुनिया मैं  मदर टेरेशा का होना एक कल्पना मात्र बन के रह गयी हैं. आज अपने बेगाने होने लगें हैं शायद ये आज की समय की मांग हैं या  सिकुर्ती दुनिया कारण जो भी हो. आज आदमी या मनुष्य की अन्तर आत्मा मर चुकी हैं या तो जीवित ही नहीं हो पायी हैं. मदर ने जिस तरह दुनिया को शिखाया की मनुष्य असहाय मानव की किश तरह मदद कर सकता हैं अगर उसके अंदर मानव के प्रति प्रेम हैं तो वो उनसे दूर नहीं रह सकता. आज इस दुनिया मैं मदर टेरेशा की बहुत जरूत हैं. आज जिसे देखो वो ही पराया हैं . आज मानव जाती को जरुरत हैं मदर टेरेशा की काश हमारे विश्व मैं आज मदर टेरेशा फिर से जीवित हो जाये. मदर टेरेशा एक मानव नहीं थी किय्नोकी मानव मैं इतनी शक्ति हो ही नहीं सकती वो तो एक पवित्र आत्मा थी. जो जाती धर्म से ऊपर की आत्मा थी. जिस ने अपने जीवन काल मैं सिर्फ सेवा और सिर्फ सेवा की वो किसी एक कोम की हो ही नहीं सकती. वो हमारे जैसे मानव जाती के लिए वरदान थी. जिसे हम ने खो दिया. आज सारा विश्व उस पवित्र आत्मा की पूजा कर रहा है. हमभी अपने निश्चल भाव से उनके चरणों मैं श्रधा के फूल चढ़ाएं और प्राथना करे की हैं माँ जिस  तरह तुम्हारे अंदर ताकत थी काश उस ताकत और शक्ति  का एक कतरा भी हमारे भीतर समां जाये तो मैं अपने मानव जीवन को धन्य मानु.

मंगलवार, अगस्त 24, 2010

Rajneeti Aur Paisa

आजकल जिस तरह कहा जा रहा है की राजनीती मैं युवा आये क्या यह संभव है कियोंकी जिस तरह से राजनीती मैं पैसों का खेल हो रहा है उसतरह हम एक साफ सूत्री राजनीती की कल्पना नहीं कर सकते हैं. पैसा ही आज राजनीती का खेल खेलती  हैं. आज की  राजनीती भ्रष्ट हो गयी हैं. और हम चाहते हैं की भ्रष्ठाचार मुक्त समाज हो. और कल्पना कर रहे हैं  ये तो बेमानी हैं साब. आज कोई किशी खास जमात को खुश करने मैं लगा है तो किशी और को. ये कब तक चलेगा साब. ये बंद होना  चाहिए. क्या आज से पहले स्व० इंदिरा गाँधी अगर अपनी सत्ता की चिंता करती तो क्या आज पंजाब खुशहाल होता. आज के राजनेता सिर्फ और सिर्फ सत्ता पाना चाहते हैं. हमारे बिहार के एक नेता हैं जो लगातार ८ साल मंत्री बने रहें काम भी किया मगेर जब वो सत्ता मैं नहीं हैं तो अनाप सनाप मांगे करते रहतें हैं. कल तक कह रहे थे की किशी खास समुदाय के व्यक्ति को CM  होना चाहिए मगेर आज सूरत क्या हैं ये सब जानते हैं. मगेर क्या ये सिर्फ सत्ता पाने का फंडा है. सत्ता मैं नहीं रहने पर इसतरह की बात करेंगे की जैशे लगेगा की इस नेता तो गंगा नहाया है (गंगा नहाना मतलब सत्यवादी). मगर सुरत ढ़ाक के तीन पात. बिहार मैं चुनाव हैं तो आप देखेंगे की तरह तरह की बातें सुनने को मिलेगी. हमारे यहाँ कहेंगी आपको हम तन्खाया देंगे तो आप की जात को नौकरी देंगे मगेर ये कोई नहीं कहेगा की हम गरीबों को मदद करेंगे किओयोंकी वो जानते हैंकी बिहार मैं वोट जात के आधार पर परतें हैं. आज की बात हैं आब लोग जान चुके हैं की विकाश क्या चीज हैं. आज मे २५ साल का युवा हूँ मैं ने आज तक जिश रोड को बचपन से देख रहा था. वो जर्जर हालात मैं था. पर आज सूरत बदली हैं. मुद्दा ये नहीं हैं की किश ने मदद की मुद्दा हैं की विकाश हो और विकाश से मातब नेता या किशी धर्म का नहीं बिहार का होना चाहिए. इस मैं युवा आये मगेर उनके पास पैसे का अभाव हैं. तो जिस तरह से पैसा लायेंगे क्या आप को लगता हैं की वो भ्रस्ताचार से मुक्त हो पाएंगे.